उत्तराखण्ड, भारतप्रतिष्ठा: सन् 1958
भूमियाधार आश्रम एवं हनुमान मंदिर
कुमाऊँ की पहाड़ियों में महाराज जी का पहला ऐतिहासिक आश्रम
वास्तविक आश्रम छायाचित्रवास्तविक फोटो

भवाली-भीमताल-नैनीताल तिराहा मार्ग, भूमियाधार, नैनीताल, उत्तराखण्ड 263128
दर्शन समय
प्रातः 6:00 बजे से सायं 7:30 बजे तक नित्य
आरती समय
प्रातः आरती: 7:00 AM | संध्या आरती: 6:30 PM
स्थान व मार्ग
भवाली-भीमताल-नैनीताल तिराहा मार्ग, भूमियाधार, नैनीताल, उत्तराखण्ड 263128
गूगल मैप्स में देखेंआध्यात्मिक महिमा एवं परिचय
भूमियाधार आश्रम कैंची धाम की स्थापना से भी पूर्व 1950 के दशक में बाबा जी द्वारा स्थापित एक अत्यंत शांत और जाग्रत तपोभूमि है। यह पहाड़ी ढलान पर स्थित महाराज जी का प्रिय एकांत स्थल था जहाँ उन्होंने भक्तों पर अनगिनत कृपा की।
स्थापना का पावन इतिहास
एक स्थानीय पहाड़ी भक्त द्वारा बाबा जी को भूमि समर्पित करने पर यहाँ पहले एक कुटिया और फिर 1967 में श्री हनुमान मंदिर की स्थापना हुई। महाराज जी अक्सर यहाँ शांत वातावरण में विश्राम और भक्तों को दर्शन दिया करते थे।
आश्रम कैसे पहुँचें
नैनीताल से 10 किमी और कैंची धाम से 8 किमी दूर भवाली मार्ग पर स्थित। टैक्सी या बस द्वारा सुगम।
श्रद्धालु नियम व सुझाव
- •सभी आश्रमों में सादगीपूर्ण एवं शालीन वस्त्र धारण करें।
- •गर्भ गृह एवं मंदिर परिसर में फोटोग्राफी वर्जित है।
- •परिसर में शांत भाव से राम नाम व चालीसा का पाठ करें।
- •महाराज जी का प्रसाद दोनों हाथों से आदरपूर्वक ग्रहण करें।
सख्त नियम: कोई ऑनलाइन दान नहीं
महाराज जी के आदेशानुसार, आश्रम ट्रस्ट कोई भी ऑनलाइन दान, UPI या डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं करता है। ऑनलाइन पूजा या वीआईपी दर्शन के नाम पर ठगी करने वालों से सावधान रहें।
पूर्णतः निःशुल्क दर्शन व भंडारा प्रसाद
सभी भक्त महाराज जी के चरणों में समान हैं।