॥ जय श्री नीब करौरी महाराज ॥
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उत्तराखण्ड, भारतप्रतिष्ठा: सन् 1968

काकड़ीघाट आश्रम एवं मंदिर

कोसी नदी के तट पर स्थित संतों की पावन तपोभूमि

वास्तविक आश्रम छायाचित्रवास्तविक फोटो
काकड़ीघाट आश्रम एवं मंदिर
अल्मोड़ा-रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग 109, काकड़ीघाट, अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड 263642
दर्शन समय

प्रातः 6:00 बजे से सायं 7:00 बजे तक नित्य

आरती समय

प्रातः आरती: प्रातः 7:00 बजे | संध्या आरती: सायं 6:30 बजे

स्थान व मार्ग

अल्मोड़ा-रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग 109, काकड़ीघाट, अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड 263642

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आध्यात्मिक महिमा एवं परिचय

काकड़ीघाट कोसी नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन तपोभूमि है, जहाँ 1890 में स्वामी विवेकानंद को पीपल के वृक्ष के नीचे दिव्य ब्रह्मांडीय अनुभूति प्राप्त हुई थी। महाराज जी ने यहाँ तपस्या की और भव्य हनुमान व शिव मंदिर की स्थापना कराई।

स्थापना का पावन इतिहास

यह स्थान सिद्ध संत सोमबारी महाराज की भी साधना भूमि रही है। महाराज जी ने सन् 1968 में यहाँ श्री हनुमान जी और भगवान शिव की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कराई।

आश्रम कैसे पहुँचें

कैंची धाम से अल्मोड़ा की ओर मात्र 22 किमी की दूरी पर NH 109 पर स्थित। कैंची से 45 मिनट का मनोरम मार्ग।

श्रद्धालु नियम व सुझाव

  • सभी आश्रमों में सादगीपूर्ण एवं शालीन वस्त्र धारण करें।
  • गर्भ गृह एवं मंदिर परिसर में फोटोग्राफी वर्जित है।
  • परिसर में शांत भाव से राम नाम व चालीसा का पाठ करें।
  • महाराज जी का प्रसाद दोनों हाथों से आदरपूर्वक ग्रहण करें।
सख्त नियम: कोई ऑनलाइन दान नहीं

महाराज जी के आदेशानुसार, आश्रम ट्रस्ट कोई भी ऑनलाइन दान, UPI या डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं करता है। ऑनलाइन पूजा या वीआईपी दर्शन के नाम पर ठगी करने वालों से सावधान रहें।

पूर्णतः निःशुल्क दर्शन व भंडारा प्रसाद
सभी भक्त महाराज जी के चरणों में समान हैं।