॥ जय श्री नीब करौरी महाराज ॥
॥ प्रसिद्ध भक्त एवं संस्मरण ॥

परम पूज्य महाराज जी के अनन्य भक्त व संस्मरण

हार्वर्ड के प्राध्यापक से लेकर वैश्विक चिकित्सकों और संगीतकारों तक—महाराज जी के असीम वात्सल्य ने कैसे उनके जीवन की दिशा को सदा के लिए बदल दिया।

B

बाबा राम दास (डॉ. रिचर्ड अल्पर्ट)

विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं लेखक

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर, जिनकी महाराज जी से भेंट ने उन्हें पश्चिमी जगत के महानतम संतों और विचारकों में बदल दिया।

1967 में जब रिचर्ड अल्पर्ट भारत आए, तब महाराज जी ने उनके मन के अंतरतम विचारों को जानकर उन्हें नया आध्यात्मिक जीवन दिया और नाम दिया "राम दास"। अमेरिका लौटकर उन्होंने "बी हियर नाउ" पुस्तक लिखी जिसने लाखों पश्चिमी साधकों को भारतीय सनातन धर्म, भक्ति और सेवा से जोड़ा। 2019 में अपने महाप्रयाण तक राम दास जी महाराज जी के प्रेम के संवाहक बने रहे।
उन्होंने मुझसे इसलिए प्रेम नहीं किया कि मैं अच्छा था; उन्होंने मुझसे प्रेम इसलिए किया क्योंकि वे स्वयं प्रेम के साक्षात स्वरूप थे।
K

कृष्णा दास (जेफरी कागेल)

विश्वविख्यात कीर्तन गायक एवं अनन्य भक्त

अमेरिकी संगीतकार जिन्होंने अपना सब कुछ त्यागकर महाराज जी के चरणों में शरण ली, और बाद में दुनिया भर के विशाल प्रेक्षागृहों में हनुमान चालीसा और कीर्तन की अमृत धारा बहाई।

1960 के दशक के उत्तरार्ध में रॉक बैंड का प्रस्ताव ठुकराकर जेफरी भारत पहुंचे। बाबा जी ने उन्हें "कृष्णा दास" नाम दिया और भगवान का नाम गाने का आदेश दिया। आज कृष्णा दास जी दुनिया के कोने-कोने में हज़ारों श्रोताओं को राम नाम और हनुमान चालीसा के पावन रस से सराबोर कर रहे हैं।
महाराज जी ने मुझे सिखाया कि सच्चा प्रेम हमारे भीतर ही है, और वह प्रेम कभी समाप्त नहीं होता।
D

डॉ. लैरी ब्रिलियंट

प्रसिद्ध महामारी विशेषज्ञ एवं समाजसेवी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख चिकित्सक, जिन्होंने महाराज जी के प्रत्यक्ष आदेश और आशीर्वाद से धरती से चेचक का समूल नाश किया।

कैंची धाम में साधु वेश में रह रहे लैरी ब्रिलियंट को बाबा जी ने आदेश दिया कि वे दिल्ली जाकर डब्ल्यूएचओ के अभियान से जुड़ें। बाबा जी के वचनों के बल पर लैरी ने चेचक उन्मूलन के ऐतिहासिक वैश्विक महाअभियान का सफल नेतृत्व किया।
महाराज जी के चमत्कार किसी प्रदर्शन के लिए नहीं थे; वे मानवता के कल्याण हेतु प्रभु की अहैतुकी कृपा के दिव्य प्रकटीकरण थे।
S

सुधीर मुखर्जी (दादा मुखर्जी)

महाराज जी के अनन्य गृहस्थ भक्त एवं ग्रंथकार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, जिनका निवास दशकों तक शीतकाल में महाराज जी का पावन विश्राम स्थल रहा।

दादा मुखर्जी और दीदी महाराज जी के अत्यंत अंतरंग भक्तों में थे। तीस से अधिक वर्षों तक बाबा जी उनके इलाहाबाद स्थित आवास पर रहे। दादा जी द्वारा रचित पुस्तकें महाराज जी की लीलाओं का सबसे प्रामाणिक दस्तावेज हैं।
बाबा जी के सानिध्य में रहना साक्षात सरलता, वात्सल्य और अनंत ईश्वरीय शक्ति के सागर में गोते लगाने जैसा था।
॥ आधुनिक विश्व पर प्रभाव ॥

सिलिकॉन वैली का आध्यात्मिक स्रोत: स्टीव जॉब्स एवं मार्क जुकरबर्ग

सन् 1974 में युवा स्टीव जॉब्स अंतःप्रेरणा की खोज में कैंची धाम पहुंचे। दशकों बाद जब मार्क जुकरबर्ग जीवन के चौराहे पर खड़े थे, तो स्टीव जॉब्स ने उन्हें कैंची धाम जाने का परामर्श दिया। हिमालय की शांत वादियों में बाबा जी के आशीर्वाद ने दुनिया के शीर्ष तकनीकी विचारकों को दृष्टि प्रदान की।