कैंची धाम के निकटवर्ती 10 पवित्र व दर्शनीय स्थल
कैंची धाम दर्शन के उपरांत अपनी यात्रा को और समृद्ध बनाएं। नीम करौरी बाबा द्वारा स्थापित सिद्ध धाम, प्राचीन शक्तिपीठ, शांत पहाड़ी सरोवर और हिमालय के दिव्य दृश्य — सब 10 से 45 किमी के दायरे में।
कैंची धाम से दूरी एवं यात्रा समय

हनुमान गढ़ी मंदिर, नैनीताल
“वर्ष 1950 में स्वयं नीम करौरी बाबा द्वारा स्थापित पावन तपोस्थली। यहाँ हनुमान जी की 12 फीट ऊंची दिव्य मूर्ति है जिसमें वे अपनी छाती चीरकर सीताराम के दर्शन कराते हैं।”
नैनीताल की सुरम्य तलहटी में स्थित हनुमान गढ़ी महाराज जी की अत्यंत प्रिय तपोस्थली रही है। यहाँ बाबा घंटों मौन बैठकर तराई के विहंगम दृश्य को निहारते थे। मंदिर परिसर में सीताराम मंदिर एवं शिव मंदिर भी हैं। यहाँ से ढलते सूरज का मनोहारी दृश्य पूरे कुमाऊं में प्रसिद्ध है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

भूमियाधार आश्रम एवं मंदिर
“1950 के दशक के अंत में महाराज जी द्वारा प्रतिष्ठित अत्यंत शांत पहाड़ी आश्रम, जहाँ कई विदेशी साधक पहली बार पहुंचे और चमत्कारी लीलाएं घटित हुईं।”
भवाली-हल्द्वानी मोटर मार्ग पर स्थित भूमियाधार आश्रम पुराने भक्तों के हृदय के अत्यंत निकट है। महाराज जी ने कैंची धाम से पहले यहाँ बांज और बुरांश के पेड़ों के बीच एक छोटी कुटिया बनवाई थी। यहाँ स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा के सम्मुख बैठने मात्र से मन स्वतः शांत और अंतर्मुखी हो जाता है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

काकड़ीघाट आश्रम एवं स्वामी विवेकानंद पीपल वृक्ष
“वह पावन नदी संगम जहाँ 1890 में स्वामी विवेकानंद ने पीपल के नीचे समाधि व ब्रह्मांडीय ज्ञान प्राप्त किया था, और बाद में नीम करौरी बाबा ने यहाँ आश्रम व शिव मंदिर स्थापित किया।”
कैंची धाम से 21 किमी उत्तर अल्मोड़ा मार्ग पर कोसी और सुयाल नदी के पावन संगम पर स्थित है काकड़ीघाट। यहाँ स्वामी विवेकानंद को वह परम अनुभूति हुई थी कि "पिण्ड और ब्रह्माण्ड एक ही नियम से संचालित हैं।" बाद में नीम करौरी बाबा ने इस तपोभूमि को अपने चरण कमलों से पुनः जाग्रत कर भव्य आश्रम की स्थापना की।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

माँ नैना देवी शक्तिपीठ एवं नैनी झील
“सनातन धर्म के 51 सिद्ध शक्तिपीठों में से एक, जहाँ भगवान शिव द्वारा सती के देह को ले जाते समय देवी सती के दोनों नेत्र (नयन) गिरे थे।”
नैनीताल की प्रसिद्ध नैनी झील के उत्तरी किनारे पर स्थित माँ नैना देवी मंदिर समस्त कुमाऊं की अधिष्ठात्री देवी हैं। गर्भगृह में माँ नैना देवी के पावन नयन, माँ काली और भगवान गणेश के दिव्य दर्शन होते हैं। झील में नौका विहार और मंदिर की भव्य संध्या आरती का अनुभव अलौकिक शांति प्रदान करता है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

मुक्तेश्वर महादेव एवं चौली की जाली
“350 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर जहाँ भोलेनाथ ने एक असुर को मोक्ष प्रदान किया था। यहाँ से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली की हिमाच्छादित चोटियों के विहंगम 180 डिग्री दर्शन होते हैं।”
7,500 फीट की ऊंचाई पर कुमाऊं की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला पर स्थित मुक्तेश्वर धाम आध्यात्म और हिमालयी सौंदर्य का अद्भुत संगम है। मंदिर के ठीक पीछे प्रसिद्ध "चौली की जाली" चट्टान है जहाँ से गहरी घाटी और अनंत हिमालयी शिखरों का विहंगम दृश्य मन को स्तब्ध कर देता है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

भीमताल झील एवं भीमेश्वर महादेव मंदिर
“महाभारत काल में पांडव पुत्र भीम द्वारा अपनी गदा के प्रहार से निर्मित झील। इसके तट पर राजा बाज बहादुर द्वारा 17वीं सदी में निर्मित भीमेश्वर महादेव मंदिर स्थित है।”
नैनीताल से भी बड़ी और अत्यधिक शांत भीमताल झील के बीचों-बीच एक प्राकृतिक टापू है जिस पर एक्वेरियम बना है, जहाँ केवल नाव से पहुंचा जा सकता है। झील के किनारे बना भीमेश्वर महादेव मंदिर अत्यंत प्राचीन व चमत्कारी माना जाता है। यहाँ का शांत वातावरण तीर्थयात्रियों को असीम विश्राम देता है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

सातताल (सात परस्पर जुड़ी झीलें)
“भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, और गरुड़ के नाम पर प्रसिद्ध 7 मीठे पानी की झीलों का अलौकिक समूह, जो घने बांज व चीड़ के वनों से घिरा हुआ है।”
सत्तल कुमाऊं का सबसे प्राचीन और प्रदूषण मुक्त प्राकृतिक स्थल है। राम ताल, सीता ताल, लक्ष्मण ताल, नल-दमयंती ताल जैसी सात झीलें आपस में जुड़ी हुई हैं। यहाँ मोटरबोट्स प्रतिबंधित हैं, केवल शांत चप्पू वाली नावें चलती हैं। 500 से अधिक दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट और वनों की सुगंध यहाँ ध्यान लगाने वाले साधकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

नौकुचियाताल (नौ कोनों वाली झील)
“भगवान ब्रह्मा की तपस्या से उत्पन्न नौ कोनों वाली पौराणिक झील। मान्यता है कि जो व्यक्ति एक ही स्थान से इसके सभी नौ कोने देख ले, वह मोक्ष को प्राप्त होता है।”
नैनीताल क्षेत्र की सबसे गहरी (लगभग 40 मीटर) झील नौकुचियाताल अपने नौ कोनों और प्राकृतिक भूमिगत जल स्रोतों के लिए विख्यात है। झील के किनारे खिले गुलाबी कमल, शांत नौकायन और आसपास की पहाड़ियों से पैराग्लाइडिंग का रोमांच इस स्थान को तीर्थ और प्रकृति प्रेमियों दोनों के लिए विशेष बनाता है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

भवाली हिल स्टेशन एवं फल मंडी
“कैंची धाम से मात्र 8 किमी दक्षिण में स्थित कुमाऊं का मुख्य चौराहा, जो अपनी शुद्ध चीड़ की जलवायु, टीबी सैनिटोरियम और उत्तराखंड की सबसे बड़ी फल मंडी के लिए प्रसिद्ध है।”
भवाली वह पहाड़ी संगम है जहाँ से नैनीताल, अल्मोड़ा, रानीखेत और कैंची धाम के रास्ते निकलते हैं। यहाँ की ओजोन युक्त शुद्ध जलवायु के कारण पं. नेहरू की पत्नी कमला नेहरू का यहाँ सैनिटोरियम में उपचार हुआ था। कैंची धाम आने वाले अधिकांश भक्तों के ठहरने और शुद्ध पहाड़ी फल, बुरांश का जूस व शहद खरीदने का यह सबसे प्रमुख केंद्र है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन

रानीखेत एवं चौबटिया सेब के बगीचे
“"रानी का मैदान" के नाम से विख्यात शांत छावनी नगर, जहाँ से त्रिशूल, नंदा देवी और 300 किमी लंबी हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखला का असीम विहंगम दृश्य दिखाई देता है।”
कैंची धाम से 44 किमी की दूरी पर स्थित रानीखेत अपनी असीम शांति और स्वच्छ देवदार के वनों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ चौबटिया के विशाल सेब के बगीचे, मन्नतों की घंटियों से सजा प्रसिद्ध "झूला देवी मंदिर", और कुमाऊं रेजीमेंटल सेंटर म्यूजियम दर्शनीय हैं। यहाँ का गोल्फ ग्राउंड एशिया के सबसे ऊंचे गोल्फ मैदानों में गिना जाता है।
प्रमुख आकर्षण एवं दर्शन
कैंची धाम भ्रमण योजना संबंधी प्रश्न
क्या एक ही दिन में कैंची धाम और नैनीताल दर्शन संभव है?
हाँ! अधिकांश भक्त सुबह 6:30 बजे कैंची धाम के पट खुलते ही दर्शन व प्रसाद प्राप्त करते हैं, और 11:00 बजे तक नैनीताल (19 किमी / 45 मिनट) पहुंचकर माँ नैना देवी मंदिर, शाम को हनुमान गढ़ी सूर्यास्त और नौका विहार का आनंद लेते हैं।
कैंची धाम के पास महाराज जी द्वारा स्थापित अन्य कौन से आश्रम हैं?
हनुमान गढ़ी नैनीताल (21 किमी, 1950 में स्थापित), भूमियाधार आश्रम (12 किमी, 1950 के दशक के अंत में), और काकड़ीघाट आश्रम (21 किमी, विवेकानंद संगम) ये तीनों आश्रम स्वयं नीम करौरी बाबा द्वारा प्रतिष्ठित किए गए हैं।
क्या कैंची धाम से टैक्सी और सार्वजनिक वाहन आसानी से मिलते हैं?
हाँ, कैंची धाम मुख्य द्वार के सामने हाईवे से भवाली, नैनीताल, अल्मोड़ा और हल्द्वानी के लिए निरंतर शेयरिंग टैक्सी और बसें उपलब्ध रहती हैं। मुक्तेश्वर या सत्तल के पूरे दिन के टूर हेतु भवाली टैक्सी स्टैंड (8 किमी दूर) से प्राइवेट कैब बुक की जा सकती है।
कैंची धाम के आसपास 2 दिवसीय आदर्श यात्रा परिपथ क्या है?
पहला दिन: काठगोदाम से आकर भूमियाधार आश्रम रुकें, फिर कैंची धाम में दर्शन व आरती, रात्रि विश्राम भवाली या नैनीताल में। दूसरा दिन: सुबह काकड़ीघाट (स्वामी विवेकानंद पीपल वृक्ष) दर्शन, फिर दोपहर में मुक्तेश्वर महादेव अथवा शांत सातताल सरोवर का भ्रमण।
नैनीताल के प्रसिद्ध व्यंजन, मिठाइयां व बाजार
प्रसिद्ध बाल मिठाई, सिंगौड़ी, 1944 साकलेज बेकरी, तिब्बती मोमोज, पहाड़ी थाली और मोमबत्ती बाजार की संपूर्ण गाइड।