॥ जय श्री नीब करौरी महाराज ॥
॥ जय जय श्री नीब करौरी महाराज ॥

परम पूज्य नीम करौरी बाबा महाराज जी

सब से प्रेम करो, सब की सेवा करो, सब को भोजन कराओ, ईश्वर को याद रखो।

परम पूज्य श्री नीम करौरी बाबा (महाराज जी) के पावन भक्तिधाम में आपका स्वागत है। यहाँ महाराज जी के दिव्य जीवन, आलौकिक चमत्कारों, कैंची धाम सहित प्रमुख पावन तीर्थों और अमर उपदेशों का संकलन प्रस्तुत है।

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पवित्र आश्रम व धाम

100+

प्रमाणित चमत्कार

15 June

वार्षिक कैंची भंडारा

Param Pujya Shri Neem Karoli Baba Maharaj Ji

॥ अनंत श्री विभूषित ॥

बाबा नीब करौरी महाराज

श्री हनुमान जी के साक्षात विग्रह

आज का दिव्य दर्शन एवं अनमोल विचारUniversal Love

सब से प्रेम करो, सब की सेवा करो, सब को भोजन कराओ, ईश्वर को याद रखो।

महाराज जी के जीवन का मूल मंत्र: प्राणिमात्र से निष्काम प्रेम, दीन-दुखियों की सेवा, भूखों को अन्नदान, और प्रतिक्षण परमात्मा का स्मरण।

॥ सनातन धर्म का अमृत संदेश ॥

महाराज जी के ४ पावन स्तंभ

महाराज जी ने किसी जटिल कर्मकांड के स्थान पर प्रेम, सेवा, अन्नदान और प्रभु स्मरण का सीधा मार्ग प्रशस्त किया।

सब से प्रेम करो

प्रत्येक प्राणी में परमात्मा का दर्शन करो। अहैतुक प्रेम ही समस्त साधनाओं का सार है।

सब की सेवा करो

बिना किसी फल की इच्छा के निष्काम भाव से सेवा। नर सेवा ही नारायण सेवा है।

सब को भोजन कराओ

अन्नदान ही परम धर्म है। महाराज जी के द्वार से कोई भी भूखा नहीं लौटा।

ईश्वर को याद रखो

प्रतिक्षण प्रभु राम के पावन नाम का स्मरण। निरंतर नाम जप से भव-बंधन कट जाते हैं।

॥ पावन तीर्थ यात्रा ॥

विश्व के पावन आश्रम एवं धाम

कैंची धाम से लेकर वृन्दावन समाधि मंदिर और अमेरिका के ताओस धाम तक।

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श्री कैंची धाम आश्रम
उत्तराखण्ड, भारत

श्री कैंची धाम आश्रम

कैंची धाम दो पहाड़ियों के बीच कैंची की आकृति में बसा एक अत्यंत दिव्य और पवित्र आश्रम है, जिसकी स्थापना परम पूज्य नीम करौरी बाबा महाराज ने सन् 1964 में की थी। यह धाम श्री हनुमान जी की असीम कृपा और महाराज जी की आलौकिक उपस्थिति का केंद्र है जहां देश-विदेश से लाखों भक्त दर्शन करने आते हैं।

प्रातःकाल: 6:00 AM से 12:00 PM | सायंकाल: 4:00 PM से 8:00 PM (दोपहर 12:00 से 4:00 तक कपाट विश्राम हेतु बंद रहते हैं)
दर्शन समय एवं मार्ग
श्री वृन्दावन समाधि मंदिर आश्रम
उत्तर प्रदेश, भारत

श्री वृन्दावन समाधि मंदिर आश्रम

वृन्दावन आश्रम महाराज जी का पावन महासमाधि स्थल है, जहां अनंत चतुर्दशी (11 सितम्बर 1973) को महाराज जी ने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर ब्रह्मलीन हुए। वृन्दावन परिक्रमा मार्ग पर स्थित यह आश्रम असीम शांति, भक्ति और जीवंत कृपा का परम धाम है।

ग्रीष्मकाल: 5:30 AM – 12:00 PM एवं 4:30 PM – 8:30 PM | शीतकाल: 6:00 AM – 12:30 PM एवं 4:00 PM – 8:00 PM
दर्शन समय एवं मार्ग
अकबरपुर - पावन जन्मस्थली धाम
उत्तर प्रदेश, भारत

अकबरपुर - पावन जन्मस्थली धाम

अकबरपुर परम पूज्य बाबा नीम करौरी जी की पवित्र जन्मस्थली है, जहाँ उनका प्राकट्य एक प्रतिष्ठित विप्र परिवार में बालक लक्ष्मी नारायण शर्मा के रूप में हुआ था। यहाँ आज भी बाबा जी का पैतृक घर और मंदिर स्थित है।

प्रातः 6:00 बजे से सायं 7:30 बजे तक
दर्शन समय एवं मार्ग
॥ अलौकिक लीलाएं ॥

महाराज जी के प्रामाणिक चमत्कार

भक्तों, चिकित्सकों एवं प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा लिपिबद्ध दिव्य संस्मरण।

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Mastery Over Nature1961

उफनती पहाड़ी नदी को पार करना: जब बाबा के चरण भी नहीं भीगे

कुमाऊँ में भीषण बाढ़ के दौरान जब पुल बह गया, तब महाराज जी उफनती पहाड़ी नदी के जल पर ऐसे चले मानो ठोस भूमि हो, और उनके कम्बल का एक कोना भी नहीं भीगा।

कोसी नदी, अल्मोड़ा मार्ग, उत्तराखण्डपूरी कथा पढ़ें
Omnipresence1972

एक ही समय में वृन्दावन और प्रयागराज में साक्षात उपस्थिति का चमत्कार

सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर स्थित वृन्दावन आश्रम और प्रयागराज में महाराज जी एक ही दिन, एक ही समय पर पूर्ण भौतिक रूप में उपस्थित पाए गए।

वृन्दावन एवं प्रयागराज, उत्तर प्रदेशपूरी कथा पढ़ें
Inspiration1974 & 2008

सिलिकॉन वैली का आध्यात्मिक स्रोत: स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग की कैंची यात्रा

सन् 1974 में युवा स्टीव जॉब्स महाराज जी से मिलने भारत आए। दशकों बाद जब फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग संकट में थे, तो जॉब्स ने उन्हें कैंची धाम जाने की व्यक्तिगत सलाह दी।

कैंची धाम, नैनीतालपूरी कथा पढ़ें
॥ श्री हनुमते नमः ॥

श्री हनुमान चालीसा एवं पावन आरती

महाराज जी कहते थे: "हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करो। इसमें सभी कष्टों और संकटों को हरने की शक्ति है।"

Chalisaपावन दैनिक स्तुति व पाठ

श्री हनुमान चालीसा

लिपि चयन:
अक्षर आकार:

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा विरचित दिव्य संकटमोचन स्तोत्र। महाराज जी अपने प्रत्येक भक्त को नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करने का आदेश देते थे।

दोहा: श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ चौपाई: जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै॥ संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥ भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अंत काल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा॥ दोहा: पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से श्री हनुमान जी की कृपा से समस्त संकटों का नाश होता है
॥ कृपा और रूपांतरण ॥

भक्त संस्मरण एवं अनुभव

हार्वर्ड के प्रोफेसर से लेकर संगीतकारों और वैज्ञानिकों तक—कैसे महाराज जी ने उनके जीवन को दिव्यता से भर दिया।

B

बाबा राम दास (डॉ. रिचर्ड अल्पर्ट)

विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं लेखक

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर, जिनकी महाराज जी से भेंट ने उन्हें पश्चिमी जगत के महानतम संतों और विचारकों में बदल दिया।

उन्होंने मुझसे इसलिए प्रेम नहीं किया कि मैं अच्छा था; उन्होंने मुझसे प्रेम इसलिए किया क्योंकि वे स्वयं प्रेम के साक्षात स्वरूप थे।
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K

कृष्णा दास (जेफरी कागेल)

विश्वविख्यात कीर्तन गायक एवं अनन्य भक्त

अमेरिकी संगीतकार जिन्होंने अपना सब कुछ त्यागकर महाराज जी के चरणों में शरण ली, और बाद में दुनिया भर के विशाल प्रेक्षागृहों में हनुमान चालीसा और कीर्तन की अमृत धारा बहाई।

महाराज जी ने मुझे सिखाया कि सच्चा प्रेम हमारे भीतर ही है, और वह प्रेम कभी समाप्त नहीं होता।
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D

डॉ. लैरी ब्रिलियंट

प्रसिद्ध महामारी विशेषज्ञ एवं समाजसेवी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख चिकित्सक, जिन्होंने महाराज जी के प्रत्यक्ष आदेश और आशीर्वाद से धरती से चेचक का समूल नाश किया।

महाराज जी के चमत्कार किसी प्रदर्शन के लिए नहीं थे; वे मानवता के कल्याण हेतु प्रभु की अहैतुकी कृपा के दिव्य प्रकटीकरण थे।
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महाराज जी के चरणों में प्रार्थना पत्र

अपने हृदय के भाव, आभार अथवा प्रार्थना यहाँ लिखें। महाराज जी अंतर की पुकार सुनते हैं।