Inspiration1974 & 2008कैंची धाम, नैनीताल1 मिनट पाठन
सिलिकॉन वैली का आध्यात्मिक स्रोत: स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग की कैंची यात्रा
प्रत्यक्षदर्शी संस्मरण एवं प्रमाणित लीला
“सन् 1974 में युवा स्टीव जॉब्स महाराज जी से मिलने भारत आए। दशकों बाद जब फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग संकट में थे, तो जॉब्स ने उन्हें कैंची धाम जाने की व्यक्तिगत सलाह दी।”
सन् 1974 में 18 वर्षीय युवा स्टीव जॉब्स 'बी हियर नाउ' पुस्तक से प्रेरित होकर नीम करौरी बाबा के दर्शन की उत्कट अभिलाषा लेकर भारत पहुंचे। परंतु जब वे कैंची धाम पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि महाराज जी कुछ ही माह पूर्व (सितंबर 1973 में) महासमाधि ले चुके हैं।
जॉब्स ने कई दिन कैंची और कुमाऊँ की वादियों में बिताए। उन्होंने बाबा जी के मंदिरों में ध्यान लगाया और जीवन के गहन सत्य को अनुभव किया। अमेरिका लौटकर उन्होंने 'एप्पल' (Apple) की स्थापना की और उनके उत्पादों की सादगी और आध्यात्मिक दृष्टि इसी भारतीय यात्रा की देन थी।
दशकों बाद जब फेसबुक (अब मेटा) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग गंभीर मानसिक द्वंद्व में थे कि क्या उन्हें अपनी कंपनी बेच देनी चाहिए, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें व्यक्तिगत सलाह दी—"भारत जाओ, और उसी कैंची धाम आश्रम में कुछ दिन बिताओ जहाँ मैं गया था। वहाँ तुम्हें अपने जीवन और कंपनी के वास्तविक उद्देश्य का बोध होगा।"
जुकरबर्ग ने 2008 में कैंची धाम में समय बिताया। सन् 2015 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऐतिहासिक संवाद में मार्क जुकरबर्ग ने स्वयं इस बात का खुलासा किया कि कैसे कैंची धाम और नीम करौरी बाबा के आशीर्वाद ने उन्हें नई दिशा प्रदान की।
इस लीला से जुड़ा पावन तीर्थ स्थल
आश्रम के दर्शन व समय देखेंकैंची धाम, नैनीताल
॥ सब कुछ महाराज जी की अहैतुकी कृपा से है — सब एक ॥