Omnipresence1972वृन्दावन एवं प्रयागराज, उत्तर प्रदेश1 मिनट पाठन
एक ही समय में वृन्दावन और प्रयागराज में साक्षात उपस्थिति का चमत्कार
प्रत्यक्षदर्शी संस्मरण एवं प्रमाणित लीला
“सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर स्थित वृन्दावन आश्रम और प्रयागराज में महाराज जी एक ही दिन, एक ही समय पर पूर्ण भौतिक रूप में उपस्थित पाए गए।”
नीम करौरी बाबा के जीवन की सबसे विस्मयकारी लीलाओं में से एक थी 'द्विरूपता' (Bilocation)—अर्थात एक ही समय में दो दूरस्थ स्थानों पर सशरीर उपस्थित होना।
सर्दियों के दिनों में प्रयागराज (इलाहाबाद) में प्रोफेसर दादा मुखर्जी के आवास पर महाराज जी पधारे हुए थे। शाम सात बजे से लेकर रात के दस बजे तक बाबा जी बीसियों भक्तों के साथ बैठक में बैठे थे, चाय पी रहे थे और कीर्तन का आनंद ले रहे थे।
उसी सप्ताह वृन्दावन आश्रम के व्यवस्थापक का पत्र आया, जिसमें लिखा था कि उसी विशेष शाम को ठीक आठ बजे महाराज जी वृन्दावन पधारे थे, उन्होंने मंदिर निर्माण का निरीक्षण किया, तीन भक्तों को प्रसाद दिया और आवश्यक निर्देश दिए।
दोनों स्थानों के भक्तों ने समय और तारीख का मिलान किया। चार सौ किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित दोनों शहरों में महाराज जी की भौतिक उपस्थिति निर्विवाद रूप से प्रमाणित हुई। जब दादा मुखर्जी ने विस्मित होकर पूछा, तो बाबा जी हंसते हुए बोले—"जो ईश्वर में लीन है, उसके लिए दूरी और समय का कोई बंधन नहीं होता।"
इस लीला से जुड़ा पावन तीर्थ स्थल
आश्रम के दर्शन व समय देखेंवृन्दावन एवं प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
॥ सब कुछ महाराज जी की अहैतुकी कृपा से है — सब एक ॥