Healing & Grace1955भूमियाधार एवं भवाली, उत्तराखण्ड1 मिनट पाठन
कुमाऊँ की पहाड़ियों में हैजा और महामारी का निवारण
प्रत्यक्षदर्शी संस्मरण एवं प्रमाणित लीला
“जब पर्वतीय गांवों में भयंकर महामारी फैली और कोई वैद्य उपलब्ध नहीं था, तब बाबा जी ने कुएं के अभिमंत्रित जल और तुलसी दल से महामारी का प्रकोप तत्क्षण रोक दिया।”
सन् 1950 के दशक में जब कुमाऊँ की पहाड़ियों में आधुनिक सड़कें और अस्पताल नहीं थे, तब भवाली और भूमियाधार के समीपवर्ती गांवों में हैजे की भयंकर महामारी फैल गई। प्रतिदिन दर्जनों ग्रामीण काल के गाल में समा रहे थे और घाटों पर चिताएं बुझने का नाम नहीं ले रही थीं।
हताश और भयभीत ग्रामीण रात भर चलकर बाबा जी की कुटिया पहुंचे और रोते हुए चरणों में गिर पड़े—"बाबा! हमारे बच्चों को बचा लीजिए, पूरा गांव उजड़ रहा है!"
महाराज जी का हृदय करुणा से भर आया। वे ग्रामीणों के साथ गांव के कुएं पर पहुंचे। बाबा जी ने कुएं के मुंडेर पर खड़े होकर गंगाजल और तुलसी पत्र जल में डाले और प्रार्थना की।
फिर उन्होंने ग्रामीणों से कहा—"जाओ, इस कुएं का पानी भरो और हर बीमार को पिलाओ। हनुमान जी की कृपा से आज के बाद इस बीमारी से एक भी प्राणी की मृत्यु नहीं होगी!"
गांव वालों ने उस अभिमंत्रित जल को घर-घर पहुंचाया। जो मरीज मृत्यु शैया पर पड़े थे, उन्होंने जैसे ही वह जल पिया, उनके शरीर में चेतना लौट आई, उल्टियां थम गईं और बुखार उतर गया। उस दिन के बाद से पूरे क्षेत्र में महामारी का प्रकोप पूरी तरह शांत हो गया। आज भी कुमाऊँ के लोग महाराज जी को अपने कुलदेवता और रक्षक के रूप में पूजते हैं।
इस लीला से जुड़ा पावन तीर्थ स्थल
आश्रम के दर्शन व समय देखेंभूमियाधार एवं भवाली, उत्तराखण्ड
॥ सब कुछ महाराज जी की अहैतुकी कृपा से है — सब एक ॥