॥ जय श्री नीब करौरी महाराज ॥
Transcendental Wisdom1967हनुमान गढ़ी, नैनीताल, उत्तराखण्ड2 मिनट पाठन

बाबा जी और एलएसडी की परीक्षा: जब ९०० माइक्रोग्राम दवा भी निष्प्रभावी रही

प्रत्यक्षदर्शी संस्मरण एवं प्रमाणित लीला

जब हार्वर्ड के प्रोफेसर रिचर्ड अल्पर्ट ने बाबा जी को ९०० माइक्रोग्राम शुद्ध एलएसडी दी, तो महाराज जी ने उसे बिना किसी हिचकिचाहट के निगल लिया और उन पर कोई असर नहीं हुआ, सिद्ध किया कि आत्मज्ञान रसायनों से परे है।

सन् 1960 के दशक के उत्तरार्ध की बात है। डॉ. रिचर्ड अल्पर्ट (जो बाद में बाबा राम दास कहलाए) हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शीर्ष मनोवैज्ञानिक थे और मानवीय चेतना पर शोध कर रहे थे। उनके पास शुद्ध 'सैंडोज एलएसडी' की अत्यधिक शक्तिशाली गोलियां थीं। एक सामान्य व्यक्ति के लिए 100 माइक्रोग्राम की मात्रा भी बारह घंटे तक चेतना को अस्त-व्यस्त करने के लिए पर्याप्त थी। अल्पर्ट के मन में एक गहरा वैज्ञानिक संशय था—क्या भारतीय योगियों की समाधि अवस्था केवल मानसिक भ्रम है या वास्तव में वे इन रसायनों से परे किसी परम चैतन्य में स्थित हैं? एक सुबह नैनीताल के हनुमान गढ़ी में महाराज जी ने अल्पर्ट को बुलाया और अचानक पूछा—"क्या तुम्हारे झोले में वह दवा है?" अल्पर्ट ने कहा—"हाँ बाबा।" "मुझे दो!" बाबा जी ने हाथ आगे कर दिया। अल्पर्ट ने झिझकते हुए 300 माइक्रोग्राम की एक गोली निकाली। बाबा जी ने हाथ हिलाकर कहा—"और दो!" अल्पर्ट ने दूसरी, और फिर तीसरी गोली निकाली—कुल 900 माइक्रोग्राम, जो किसी भी तीन सामान्य पुरुषों के होश उड़ाने के लिए पर्याप्त थी। अल्पर्ट कुछ कह पाते, उससे पहले ही महाराज जी ने तीनों गोलियां एक साथ मुंह में डालीं और शक्कर के दानों की तरह चबाकर गटक गए! अल्पर्ट की धड़कनें तेज हो गईं। वे मेडिकल स्टॉपवॉच लेकर बाबा जी के पुतलियों के फैलाव, नाड़ी और व्यवहार की निगरानी करने लगे। घंटे बीतते गए। महाराज जी सहज रूप से भक्तों से बातें करते रहे, बच्चों को फल बांटते रहे और विनोद करते रहे। उनकी आँखों में या व्यवहार में रत्ती भर भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ। दोपहर में बाबा जी ने अल्पर्ट की पीठ थपथपाई और मुस्कराकर कहा—"यह दवा केवल कमरे की एक क्षणिक झलक दिखा सकती है। पर यदि उस कमरे में सदा के लिए वास करना है, तो केवल प्रभु प्रेम और निष्काम भक्ति ही वहाँ पहुंचा सकती है। ईसा मसीह को ईश्वर को जानने के लिए किसी रसायन की आवश्यकता नहीं थी।" इस घटना ने पूरे पश्चिमी जगत की आध्यात्मिक दिशा बदल दी।

सब कुछ महाराज जी की अहैतुकी कृपा से है — सब एक

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